दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,

दया करना हमारी आत्मा को शुद्धता देना,

दया कर दान भक्तिं का....

हमारे ध्यान में आओ प्रभु आँखों में बस जाओ,

अंधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना,

दया कर दान भक्तिं का....

बहा दो प्रेम की गंगा दिलो में प्रेम का सागर,

हमें आपस में मिलजुल कर प्रभु रहना सिखा देना,

दया कर दान भक्तिं का....

हमारा धर्म हो सेवा हमारा कर्म हो सेवा,

सदा ईमान हो सेवा सफल जीवन बना देना,

दया कर दान भक्तिं का.....

वतन के वास्ते जीना,

वतन के वास्ते मरना,

वतन पर जा फ़िदा करना,

प्रभु हमको सिखा देना,

दया कर दान भक्तिं का,

हमें परमात्मा देना।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।