पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

दर्शन करने आऊं मैं दर्शन करना चाहू मैं

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

तेरी सुरत ओ सांवरियां मेरे मन में बस गई से,

देखन ने शिंगार ओ बाबा म्हारो मनडो तरसे से

मोटे मोटे नैन श्याम के म्हारो काजला धडके है

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

मेरे मन में आवे बाबा पंशी बन उड़ जाऊ मैं

खाटू नगरी पोंछ के बाबा थारा दर्शन पाऊ मैं

दिल को हाल सुनाऊ बाबा थारो भी सुन आऊ मैं

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

मोर छड़ी को झाडो ल्या दे तेरो को क्या घट जावे जी

हाथ उठा के सिर पे रख दे थारो क्या लग जावे जी

तू न सुने तो ओ सांवरियां ओर कठे मैं जावा जी

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

दास सुनीता शीश निभाबे थारा भजन सुनावे जी

भूल चुक की माफ़ी माँगा दर्शन करना चाहवा जी

एक बार बाबा दर्शन दे दो भव से मैं तर जाऊ जी

पलकां ने खोलो न बाबा दर्शन करने आऊं मैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।