एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है,

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है,

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है,

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है,

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे,

मेरे बाबा…..

इतना बता दो कहा तुम नहीं हो,

ये सब को पता है की तुम हर कहीं हो,

अगर तुम ना होते तो दुनिया ना होती,

अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति,

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे,

बर्फो में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे,

अग्नि में धधक तुमसे,

जिस ओर नज़र डालू, तेरा ही नजारा है,

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है,

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है,

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है,

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है,

कन्हैया…..

विश्वास मेरा ये टूटे ना प्यारे,

तुम्हिको लगानी है नैया किनारे,

चले आओ ढूंढो ना कोई बहाना,

सोचो जरा है ये रिश्ता पुराना,

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है

नैया का खिवैया तो, अब तू ही कन्हैया है

अब तू ही कन्हैया है

अब पार लगा बाबा, मंझधार किनारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

इस तन में रमे हो तुम,

इस मन में रमे हो तुम

ऐ मेरे बाबा….,

तुझसे जुडी है मेरी हर कहानी,

तुम्ही दे रहे हो मुझे दाना पानी

ये अहसान तेरा मैं कैसे चुकाऊं

दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊं

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम

मैं तुमको कहा ढूँढूँ, इस दिल में बसे हो तुम

इस दिल में बसे हो तुम

घनश्याम दरस देदो, कोई न हमारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है‘

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।