आरती घालीन लोटांगण

पारंपरिक
श्री गणेश आरती गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

घालीन लोटांगण, वंदीनचरण।

डोळ्यांनीपाहीनरुपतुझें।

प्रेमेंआलिंगन, आनंदेपूजिन।

भावेंओवाळीन म्हणेनामा।।१।।

त्वमेवमाताचपितात्वमेव।

त्वमेवबंधुक्ष्च सखात्वमेव।

त्वमेवविध्याद्रविणं त्वमेव।

त्वमेवसर्वंममदेवदेव।।२।।

कायेनवाचामनसेंद्रीयेव्रा, बुद्धयात्मनावाप्रकृतिस्वभावात।

करोमियध्य्तसकलंपरस्मे, नारायणायेति समर्पयामि।।३।।

अच्युतंकेशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम।

श्रीधरं माधवंगोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचंद्रभजे।।४।।

हरेरामहरराम, रामरामहरेहरे।

हरेकृष्णहरेकृष्ण, कृष्णकृष्णहरेहरे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।