मुझे तो श्याम रिझाना जी चाहे लोग बोलिया बोले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लोग बोलियाँ बोलें ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें

मुझे तो श्याम रिझाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें

झलक देख ली जिस दिन से

मैं उसका बना दीवाना,

मुझको मेरा श्याम मिले ,

बस मैंने दिल में ठाना

लोग बोलियाँ बोलें ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

इसे तो अपना बनाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

मुझे तो श्याम रिझाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

प्रेम डोर से बाँध लिया है ,

छोड़ कहाँ जाएगा ,

प्रेम हमारा सच्चा है तो

एक दिन रंग लाएगा,

लोग बोलियाँ बोलें ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

मुझे तो प्रेम निभाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

मुझे तो श्याम रिझाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

प्रेम के वश में रहता है ये ,

प्रेम बिना जग सूना ,

बनवारी भगतों के दिल में रहता श्याम सलोना ,

लोग बोलियाँ बोलें ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

कन्हैया प्रेम दीवाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

मुझे तो श्याम रिझाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

लोग बोलियाँ बोलें ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

मुझे तो श्याम रिझाना जी ,

चाहे लोग बोलियाँ बोलें ,

भजन गायक - सौरभ मधुकर

भजन रचयीता - जय शंकर चौधरी "बनवारी जी"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।