दिया नाथ ने दुष्ट को करनी का परिणाम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिया नाथ ने दुष्ट को करनी का परिणाम

किन्तु कृष्ण संग हो गया अमर कंस का नाम

लक्श कंस उदेश कंस कृष्णा अवतार का कंस की कारण,

कंस को मार के प्रभु वर ने किया वो देवी का कष्ट निवारण

दमक एक बेह पूरण हुआ जिस हेतु किया हरी नर संधारण

कृष्ण के हाथो गति पाई कंस का भाग्य नही साधारण

वैर भाव से ही किया सदा कृष्ण का ध्यान

मिला अंत एह कंस को हरी चरणों में स्थान

जय जय किरपा निधान

अदम पापी देह आत्मा हरी चरण में आ गई

ज्योति में ज्योत समा गई साह्मुं मुक्ति पा गई

यह भक्त लीला देख सुन कर पुष्प बरसाने लगे

जय कृष्ण जय जय जय श्री कृष्ण सब गाने लगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।