शिव पंचाक्षर महा मन्त्र

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय

भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय

तस्मै न काराय नमः शिवायः॥

मंदाकिनी सलिल

चंदन चर्चिताय

नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय

तस्मै म काराय नमः शिवायः॥

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय

तस्मै शि काराय नमः शिवायः॥

वसिष्ठ कुम्भोद्भव गौतमार्य

मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय

तस्मै व काराय नमः शिवायः॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय

पिनाकहस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगंबराय

तस्मै य काराय नमः शिवायः॥

पंचाक्षरमिदं पुण्यं यः

पठेत् शिव सन्निधौ।

शिवलोकमवाप्नोति

शिवेन सह मोदते॥

||इति श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम्||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।