अब मुझे बंसी सुनाना नही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू है कारो कारो मैं हु गोरी गोरी

जमती नही तेरी मेरे संग में जोड़ी

कभी भूले से भी मेरे पीछे अब तो वो चकर लगाना नही

अब मुझे बंसी सुनाना नही बंसी वट पे अब बुलाना नही

भूल जा अपनी प्रेम कहानी नही रही मैं तेरी दीवानी

ब्रिज का छलियाँ नाम है तेरा करता बाते कपट भरी है

छेड़ खानी के बिन तूने ना कोई प्रेम की बात करी है

क्या होती है रीत प्रेम की आकर निभाना नही

अब मुझे बंसी सुनाना नही बंसी वट पे अब बुलाना नही

माखन चुरा के खाताहै तू तो

सखियों के चीर चुराता है तू तो

तेरे जैसा ना कोई देखा न समजे तू आपस सधारी

तेरी मेरी निभे न यारी

सच केहता है राज अनाडी झूठी हम दर्दी वाला प्यार अब मेरे उपर लुटाना नही

अब मुझे बंसी सुनाना नही बंसी वट पे अब बुलाना नही

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।