बाबोसा का द्वार जहाँ

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॥ पावन पाठ ॥

बाबोसा का द्वार जहाँ वहाँ मेरा आशियाना,

मुझे दरबार मिला करूँ तेरा शुकराना,

बाबोसा का द्वार जहां...

सब जानते है क्या था मेरी जिंदगी में पहले,

मुझे कोन जानता था तेरी बंदगी से पहले,

करके कृपा मुझ पर दिया ऐसा नजराना,

मुझे दरबार मिला करूँ तेरा शुकराना,

बाबोसा का द्वार जहां...

बदले अगर ये दुनिया बदले अगर जमाना,

मेरी जिंदगी के मालिक कही तुम बदल न जाना,

तू ही तो है साथी मेरा सच्चा तेरा याराना,

मुझे दरबार मिला करूँ तेरा शुकराना,

बाबोसा का द्वार जहां.....

तुमसे यही अभिलाषा जब भी मेरा जनम हो,

तेरे नाम से शुरू हो तेरे नाम पे खतम हो,

सामने हो जब दिलबर लिखू ऐसा अफसाना,

मुझे दरबार मिला करूँ तेरा शुकराना,

बाबोसा का द्वार जहां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।