नाम प्रभु का भजले

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॥ पावन पाठ ॥

भजले नाम प्रभु का भजले,

धरले प्रभु मूरत मन धरले,

यह संसार रेन का सपना,

इससे मोह तू तज दे...

काम क्रोध मद मोह भुलाकर,

प्रेम दया अपनाले,

विषय भोग से वैरागी बन,

सतगुरु सुमिरन करले...

भजले नाम प्रभु का भजले...

माया झूठ कपट छल छोड़ो,

निश्छल मैन को करले,

ओस बूंद सा सारा जीवन,

सतगुरु सुमिरन करले...

भजले नाम प्रभु का भजले...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।