रामायण चौपाई मंगल भवन मंगल हारी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मंगल भवन अमंगल हारी

द्रबहु सुदसरथ अचर बिहारी

राम सिया राम सिया राम जय जय राम -

हो, होइहै वही जो राम रचि राखा

को करे तरफ़ बढ़ाए साखा

हो, धीरज धरम मित्र अरु नारी

आपद काल परखिये चारी

हो, जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू

सो तेहि मिलय न कछु सन्देहू

हो, जाकी रही भावना जैसी

रघु मूरति देखी तिन तैसी

रघुकुल रीत सदा चली आई

प्राण जाए पर वचन न जाई

राम सिया राम सिया राम जय जय राम

हो, हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता

कहहि सुनहि बहुविधि सब संता

राम सिया राम सिया राम जय जय राम

अपलोड कर्ता - ललित गेरा झज्जर

(SLG Musician)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।