फटया कलेजा मेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मां अम्बे मां भोली मां

फटया कलेजा मेरा फेर वी मैं रोई ना

सबना नू वीर दिते मेरा वीर कोई ना

फटया कलेजा मेरा फेर वी में रोई ना

अम्बे मां मेरी मां भोली मां

इक ना बहना नू देवे पांज सात वीर मां

मेरेया नसिबा विच क्यों खींची ए लकीर मां

ज्योंदी मर जावा गि जे सुनी हरजोई ना

सबना नू वीर......

रखड़ी दा दिन आवे रूह रूह कंबे मा

मेरे जेहि चनड्री ना किसे घर जमे ना

बीरा बिना बहना दा ए दुनिया च कोई ना

सबना नू वीर......

तकया सी जद एना अखियां दी बारी चो

बन्नदी सी रखड़ी कोई पला फाड़ साड़ी तो

तक्या जरूर सी पर ओथे में खलोई ना

सबना नू वीर......

DEEPANSHU KATHPAL

(9782213145)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।