सांगलपति की दरगाह ठाढ़ी

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सांगलपति की दरगाह ठाडी ,दुखिया रा दुःख हरणी,

अडिग आसन है साहेब का ,जय साहेब की करणी,

संत रूप हो आप अरूपी, दुखिया देखी धरणी ,

सत का राज सत शब्दा सागे, सुरता नारी परणी,

अवधूता की धूणी माता,सत की लिया कतरनी,

तैतिष कोटि देवता हाजिर, दुर्गा खप्पर भरणी,

जंतर मंतर जादू टूना में ,संसारी है मरणी

सत्संग नैया मोक्ष दायिनी, पार करे बैतरणी,

खींवादास जी सतगुरु मिलगा, दे दिया नाम निस्सरणी,

नवरंग छोटे मुख से कैया, शोभा जाए वरणी,

विनोद बामणिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।