सांगलिया दरगाह प्यारी

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

यहाँ दूर दूर से दर्शन करने ,आते है नर नारी

सांगलिया दरगाह प्यारी ,

यहाँ ज्योत अखंडी जगदम्बा की,संत तपस्या साजे,

ये लक्कड़ फक्कड़ की तपो भूमि है, निकलंग की नोपत बाजे,

यहाँ वचनसिद्ध है महापुरुष ,है बड़े तपधारी,

श्री लक्कड़ मंगल और मिठाराम जी, दुल दास जी स्वामी,

श्री राम मान और लादूदाता ,खिंवादास जी नामी,

भगतदास जी ,बंशी दास जी ,ओमदास जी अवतारी,

है अडिग आसन्न सांगलपति का, सत का लगता पहरा,

पूनम और अमावस मेलो लागे ,आवे भगत घनेरा ,

सुबह शाम नित होव आरती, जागे अलख करारी,

यहाँ पर उपकारी संत बड़े ,दयालु और दातारा ,

निर्गुण से सगुण भये प्रकट ,ले परमार्थ अवतारा,

विनोद महिमा मोकळी गावे,आयो शरण तिहारी,

विनोद बामणिया 7610000645

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।