ओ म्हारा बाबोसा सरकार म्हारे आँगणे पधारो जी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - नीले घोड़े रा असवार ....

दोहा - विघ्नहरण मंगलकरण , चूरू वाले बाबोसा रो नाम,

जो कोई बाबोसा रे धाम में आवे ,

बाबोसा पूरे सगळा काम,

ॐ बाबोसा ..जय जय बाबोसा,

जय हो...

ओ म्हारा बाबोसा सरकार ,

थासू विनती बारम्बार म्हारे आँगणे पधारो जी

बाबोसा म्हारे , आँगणे पधारो जी

ॐ बाबोसा जय जय बाबोसा जय हो...

कुमकुम कलश सजायो ,बाबा तोरण द्वार बंधायो,

फूलों री कलियाँ सु बाबा घर आँगण महकायो ,

जगमग दीवले री है कतार

भावा मीठी है मनुहार म्हारे आँगणे पधारो जी

बाबोसा म्हारे , आँगणे पधारो जी,

ॐ बाबोसा जय जय बाबोसा जय हो...

माँ छगनी रा लाल था बिन सुनी कुटिया हमारी

दर्शन ने म्हारा नैणां तरसे , राह निहारे तुम्हारी

राखो राखो म्हारी लाज

म्हाने दो दर्शन थे आज ,म्हारे ,अँगणे पधारो जी

बाबोसा म्हारे , आँगणे पधारो जी.

ॐ बाबोसा ..जय जय बाबोसा जय हो...

थे ही जाणों सब रे मन री थाने के बतलावां

थासू मिलण री आस है म्हाने ,दर्शन कर सुख पावा

वैभव करे है मनुहार "दिलबर " आओ एक बार ,

म्हारे आँगणे पधारो जी बाबो सा म्हारे,

आँगणे पधारो जी..

ॐ बाबोसा ..जय जय बाबोसा. जय हो..

ओ म्हारा बाबोसा सरकार ,

थासू विनती बारम्बार

म्हारे आँगणे पधारो जी बाबोसा म्हारे ,

आँगणे पधारो जी,

ॐ बाबोसा ..जय जय बाबोसा जय हो...

।।।।

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीप सिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र .

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।