माँ तेरी रहमत

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

किंझ लिखा मैं तेरी , रहमत वारे

जेहड़ी तू बक्शी हैं माये नी

मेरा एकला एकला साह भी तेरा ,

माँ लख़ लख़ शुक्र मनाये नी

माँ लख़ - लख़ शुक्र मनाये नी,

माँ तेरी रहमत ने , तारिया ए जग सारा ,

माँ तेरी रहमत ने , तारिया ए जग सारा,

जो श्रद्धा नाल सिमरन करदा,

जो श्रद्धा नाल सिमरन करदा,

होवे पार उतारा माँ तेरी रहमत ने ,

तारिया ए जग सारा,

धरती गगन पाताल च माये, तेरी ही है माया,

ऋषि मुनी सिद्ध जोगिया ने भी भेद न तेरा पाया,

धरती गगन पाताल च माये,

तेरी ही है माया,

ऋषि मुनी सिद्ध जोगिया ने भी भेद न तेरा पाया,

चन सूरज तारे भी चमकन चन सूरज तारे भी चमकन,

लैके नाम सहारा माँ तेरी रहमत.....................

चार युगा विच तेरी ज्योति ,जग मग -जग मग जगदी ,

दसों दिषावा चानण करदी , बड़ी प्यारी लगदी ,

चार युगा विच तेरी ज्योति ,जग मग -जग मग जगदी ,

दसों दिषावा चानण करदी , बड़ी प्यारी लगदी ,

हर एक मंदिर -हर मन अंदर

हर एक मंदिर हर मन अंदर,

पैंदा है लिश्कारा माँ तेरी रहमत.....................,

तेरियां रमझा -साडिया समझा , फर्क है इस विच वाहला,

महिमा लिख लिख धन हो गया , करमा रोपड़ वाला ,

तेरियां रमझा -साडिया समझा , फर्क है इस विच वाहला ,

महिमा लिख लिख धन हो गया , करमा रोपड़ वाला ,

तू भगतां दी वाह फड़ लैंदी जद भगतां दी वाह फड़ लैंदी ,

देंदी आप सहारा माँ तेरी रहमत.....................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।