कभी फुर्सत हो तो बजरंगी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कभी फुर्सत हो तो बजरंगी,निर्धन के घर भी आ जाना |

जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

ना चोला चढ़ा सका चाँदी का, ना चादर घर मेरे राम लिखी |

ना पेडे बर्फी मेवा बाबा, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़े ||

इस श्रद्धा की रख लो लाज प्रभु, इस विनती को ना ठुकरा जाना |

जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

जिस घर के दिए मे तेल नहीं, वहां जोत जगाओं कैसे |

मेरा खुद ही बिशोना डरती प्रभु, तेरी चोंकी लगाऊं मै कैसे ||

जहाँ मै बैठा वही बैठ प्रभु, बच्चों का दिल बहला जाना |

जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

तू भाग्य बनाने वाला है, और मै तकदीर का मारा हूँ |

हे दाता संभाल भिकारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ ||

मै दोषी तू निर्दोष प्रभु, मेरे दोषों को तूं भुला जाना |

जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।