सुनी सुनी आँखे भर कर मैया तुझको पुकारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुनी सुनी आँखे भर कर मैया तुझको पुकारे ,

ममता का कोई मोल नही रे जगत के पालनहारे

मेरे बंसी वाले कृष्ण कन्हाई ढूंढे तुझे ममता मेरी,

सुन विनती मेरी देती हु दुहाई ,

आखिर में मैं माँ हु तेरी ओ मेरे बंसी वाले

भरी माखन से भरी मटकियाँ किस को जाके खिलाऊ,

आँचल से झलके है ममता किसपे जाके लुटाये

दिल के टुकड़े सुन ले दिल में होती पीड गनेरी

मेरे बंसी वाले कृष्ण कन्हाई ढूंढे तुझे ममता मेरी,

सुना आँगन सुनी गलियां सुना तट नदियाँ का

सुख गया हर फूल और पता इस दिल की भगीया का

आस की डोरी टूट न जाए करते काहे द

मेरे बंसी वाले कृष्ण कन्हाई ढूंढे तुझे ममता मेरी,

कब से तेरी राह निहारु पथरा गई है अखियाँ

कब आओ गे पूछे सारे ग्वाल बाल और सखियाँ दीप ताज फिर मिल जाए गे

मिले गी न माँ तेरी

मेरे बंसी वाले कृष्ण कन्हाई ढूंढे तुझे ममता मेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।