हे अम्बे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे आंबे माँ हे आंबे माँ ,

लगता डर है माँ दरिंदो से आके लाज बचा

हे आंबे माँ हे आंबे माँ ,

एक बेटी दुःख अपना माँ तुझको सुनाती है

रो रो कर चरणों में माँ तुझको बुलाती है,

हे आंबे माँ हे आंबे माँ ,

असुरो की मिटाती है पापियों को मिटाती है

दानवो के आंतक से तू सब को बचाती है

असुरो की मिटाती है पापियों को मिटाती है

जग्जनी दुर्गा माँ बेटी आज बुलाती है

हे आंबे माँ हे आंबे माँ ....

आज कदम कदम पर माँ दुःख बेटियां उठाती है,

जॉली मु की हाथो में जाने अपनी गवाती है

हे आंबे माँ हे आंबे माँ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।