ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई,

मेहल बना दिए कुटिया म्हारी

चमकादी मेरी नगरी सारी तने मेरी पकड़ी बहिया रे

तने कैसी लीला रचाई

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई,

मैं सु इक ब्रामण सा भिखारी क्यों मेरे पे दोलत भारी

फिराया किस्मत का पहियाँ रे तने कैसी लीला रचाई

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई,

किसे टाइम पे न इक रोटी

आज भर दिए मेरे हीरा मोती

उतम नाचे ता ता थाईया रे तने कैसी लीला रचाई

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई,

जीने मैं भुगता वो कर्म मारती जानी कदर तूने अपने यार की

के पार लगा दी नैया रे तने कैसी लीला रचाई

ओ मेरे कृष्ण कन्हिया रे तने कैसी लीला रचाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।