सर्व सुख दायिनी मैया वरदायनी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सर्व सुख दायिनी मैया वरदायनी

हे माँ नारायणी तुहि जगतारानी

हे भवानी सदा हमपे राखना कृपा

तेरे चरणों से करना ना हमको जुदा

सर्व सुख दायिनी मैया वरदायनी

हे माँ नारायणी तुहि जगतारानी

रूप मनमोहन मुख है चन्द्रमा

तेरे आँचल में ममता का सागर घाना

सर्व सुख दायिनी मैया वरदायनी

हे माँ नारायणी तुहि जगतारानी

तू सुहागन के सर हाथ रखदे आगर

सुहागन का सिंदूर होता अमर

सर्व सुख दायिनी मैया वरदायनी

हे माँ नारायणी तुहि जगतारानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।