दुनिया से दूर जा रहा हूँ माँ मैं तेरे पास आ रहा हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया से दूर जा रहा हूँ माँ मैं तेरे पास आ रहा हूँ

जय माता जय माता हर आता हर जाता ये गाया जय माता

मैं भी ये गीत गा रहा हूँ

दुनिया से दूर …

सांचा है तेरा दरबार माता झूठा ये सारा संसार माता

मैं तोड़ आया हर एक नाता

माँ सबने मुझे ठुकरा दिया है,

मैं सबको ठुकरा रहा हूँ

दुनिया से दूर …

ऐ काश मेरा भी कोई होता मेरे लिए कोई हँसता रोता

हर फूल मुझको न काँटे चुभोता

आशा निराशा का दीप बनके मैं जलता बुझता रहा हूँ

दुनिया से दूर …

शेरों पे करती है तू सवारी ये चाँद सूरज तेरे पुजारी

राजा भी तेरे दर पे भिखारी

फैला दे अपनी ममता का आँचल,

मैं हाथ फैला रहा हूं

दुनिया से दूर …

माँ मेरी माँ माँ मैं आ रहा हूँ पास तेरे ऐ माँ

माँ मैं आ रहा हूँ

जयकारा शेरां वाली दा

बोल सांचे दरबार की जय

माँ शेरां वालिये माँ मेहरां वालिये

माँ लाडां वालिये माँ जोतां वालिये

ऊंचे पहाड़ां वालिये

सांचा दरबार तेरा तू नहीं तो कौन मेरा

कर दे कृपा ऊंचे ऊंचे मंदिरां वालिये

सारे बोले जय माता दी

जम के बोलो जय माता दी

प्रेम से बोलो जय माता दी

जोर से बोलो जय माता दी

मैं नई सुणेया जय माता दी

फिर से बोलो जय माता दी

आवाज़ नई आई जय माता दी

मिल के बोलो जय माता दी

जय माता दी

ओ माँ मैं आ गया जय माता दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।