तू ही मेरी नैया तू ही मझदार ऐ

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॥ पावन पाठ ॥

तू ही मेरा माझी तू ही पतवार ऐ,

तू ही मेरी नैया तू ही मझदार ऐ,

तू ही मेरे दर्द की दवा है प्यारे मेरी हर सांस बाबा नाम तुम्हारे

तुझ बिन बाबा कौन है हमारा

तू ही मेरी नैया तू ही मझदार ऐ,

बचपन से दुखो ने पैर है पसारे

देखे न इक पल भी सुख के नजारे

चुप चाप बैठे क्यों होके किनारे

तू ही मेरी नैया तू ही मझदार ऐ,

तेरा मेरा रिश्ता है सदियों पुराना

तेरे सहारे अब जीवन बिताना

चेहल दीवाने का तू ही इक यार ऐ,

तू ही मेरी नैया तू ही मझदार ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।