पाछा जाता सांवरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पाछा जाता सांवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे,

दोहा – आंसुड़ा ढलके म्हारा,

हिवड़ो भर भर आवे,

छोड़ थाने जावा कईया,

यो धीरज छुट्यो जाय,

यो धीरज छुट्यो जाय।

पाछा जाता सांवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे,

मुड़ मुड़ के देखूं रे,

मुड़ मुड़ के देखूं रे,

मुड़ मुड़ के देखूं रे,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

नैना निगोड़ा थासु,

जद से मिलाया जी,

साँची साँची बोला म्हे,

सुध बिसराया जी,

ओल्यू थारी आवे रे,

ओल्यू थारी आवे रे,

ओल्यू थारी आवे रे,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

मिलवा ने थासु बाबा,

आऊं घणे चाव से,

मंदिर में ढोक लगाऊं,

मैं तो बड़े भाव से,

देख म्हाने मुड़ के तू,

देख म्हाने मुड़ के तू,

देख म्हाने मुड़ के तू,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

जी म्हारो चावे थाने,

साथीड़ो बनाऊं जी,

बांह पकड़ के सागे,

मैं तो ले जाऊं जी,

थाने रिझाऊं जी,

भजन सुनाऊँ जी,

थाने रिझाऊं जी,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

प्रेम डोरी कदे ना,

तोड़ियो सांवरिया,

हाथ म्हारो कदे ना,

छोड़ियो सांवरिया,

रूस मत जाजो रे,

भूल मत जाजो रे,

रूस मत जाजो रे,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

‘रोमी’ ‘चोखानी’ री,

आँख भर आई रे,

‘रजनी’ री लाज राखजो,

लेवा म्हे बिदाई रे,

होजु बुलाजो रे,

फेर बुलाजो रे,

होजु बुलाजो रे,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

पाछा जाता सांवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे,

मुड़ मुड़ के देखूं रे,

मुड़ मुड़ के देखूं रे,

दिलदार सांवरा,

पाछा जाता साँवरा,

म्हारो जी दुख पावे रे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।