तेरी हो रही माँ विदाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी हो रही माँ विदाई मन तडपे आँख भर आई

हो कैसे हाथ छोडू तेरा कैसे भेजू दूर माँ

कैसे अपने आसरो को मैं कितनी मजबूर माँ

तेरी हो रही माँ विदाई मन तडपे आँख भर आई

नो दिन थी मैया विराजी नो नो रूप में तू साजी

छाया तेरी द्वार की प्यार की लगती

सेवा गीत संग ढोलक भजती

हो कैसे हाथ छोडू तेरा कैसे भेजू दूर माँ

कैसे अपने आसरो को मैं कितनी मजबूर माँ

घर सुना सुना लगता अन्धकार ये जग लगता,

मन तडप तडप रोये जाए नींदिया भी मेरी उड़ जाए

हो कैसे हाथ छोडू तेरा कैसे भेजू दूर माँ

कैसे अपने आसरो को मैं कितनी मजबूर माँ

मैं किस को लोरी सुनाओ अब किस के गीत मैं गाऊ,

माँ कैसे तुझे बुलाऊ इस दुःख को कैसे सुनाऊ

हो कैसे हाथ छोडू तेरा कैसे भेजू दूर माँ

कैसे अपने आसरो को मैं कितनी मजबूर माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।