मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी राणा मारो या छोड़ो,

मारो या छोड़ो राणा मारो या छोड़ो,

श्याम का नाम ना भुलाउँगी...

पहला प्याला जहर का जो आया,

पहला प्याला जहर का जो आया,

अमृत समझ मैंने कंठ लगाया,

अमृत समझ मैंने कंठ लगाया,

कैसे यूँ ही मर जाउंगी,

राणा मारो या छोड़ो,

मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी...

दूजा पिटारा जो नागो का आया,

शालिग्राम जी का दर्शन पाया,

ऐसी झांकी कहाँ पाऊँगी,

राणा मारो या छोड़ो,

मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी...

तीजी जो शूलों की सेज बिछाई,

फूलों की खुशबु मेरे मन को भाई,

फिर क्यों ना सेज सो जाउंगी,

राणा मारो या छोड़ो,

मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी...

चौथे चिता में जो मुझको बिठाया,

गिरधर ने मुझको अमर बनाया,

ऐसी गोदी का सुख पाऊँगी,

राणा मारो या छोड़ो,

मैं नन्दलाल ना भुलाउँगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।