अंजनी के लाल तुमको मेरा प्रणाम हो

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अंजनी के लाल तुमको मेरा प्रणाम हो,

शत शत प्रणाम कोटि कोटि प्रणाम हो,

अँजनी के लाल तुमको.....

रूद्र रूप में तुम हो शंकर,

अति रणबाकुर रूप भयंकर,

रूद्र रूप में तुम हो शंकर,

अति रणबाकुर रूप भयंकर,

कनक भूधरा तन को प्रणाम हो,

अँजनी के लाल तुमको.......

सत योजन किया सागर पारा,

तुम्हरे बल को नहीं सुमारा,

सत योजन किया सागर पारा,

तुम्हरे बल को नहीं सुमारा,

तुम तो प्रभु अतुलित बलधाम हो,

अँजनी के लाल तुमको......

अक्षय मार वाटिका उजारि,

सोने की लंका पल में है जारी,

अक्षय मार वाटिका उजारि,

सोने की लंका पल में है जारी,

दुष्ट दलन तुम वीर हनुमान हो,

अँजनी के लाल तुमको.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।