साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो....

माखन, मिश्री का भोग लगावै

भक्तां के दिल में ये राज रजावै

यो तो मुड़कत जावै यो तो नैन मटकावै

मेरा साँवरिया, साँवरिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो......

गोकुल का ग्वाला ये तो प्यारा नंदलाला

यशोमती मईया का राज दुलारा

ये तो मटकी फोड़े ,ये तो गोपियों को छेड़े

बड़ा नटखटिया, नटखटिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो......

बाँसुरी की धुन पे ये सब को नचावै

राधा के संग सारी गोपियाँ भी नाचै

ये तो मुरली बजावै संग में मोर भी नाचै

बड़ा जादूगरिया, जादूगरिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो.......

राधाजी के संग ये तो रास रचावै

मीठी मीठी बातें करके सबको भूलावै

ये तो मोड़े कलाईयाँ ,इसकी ले लूँ बलईयाँ

बड़ा रंगरसिया, रंगरसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो.......

देवकी के जन्मा इसको यशोदा ने पाला

नंद बाबा का ये तो राजदुलारा

इसकी महिमा चहूँ ओर,

देख "मधु "इसकी ओर

हुई बाँवरिया, बाँवरिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया

ये तो बड़ा चितचोर

जब भी देखूँ इसकी ओर

ये तो मनबसिया, मनबसिया

साँवला सलोना मेरा प्यारा रे कन्हैया हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।