आ भी जा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आ भी जा आ भी जा आ भी जा

सुन ले वितनी अब तो कान्हा

तेरे दर्श को तरसे नैना

आके प्यास बुजा,आ भी जा आ भी जा

इज्जत का कोई मोल नही बस पैसे की सुन वाई है

जोगियों का वेश बना के सब ने लुट मचाई है

दुनिया तेरी दुनिया कान्हा पाप की नैया खेती है

किसी को हस्ता देख न पाए खारे आंसू देती है

डगमग ढोले धर्म की नैया तेरे सिवा है कौन खिवैया आके पार लगा

आ भी जा आ भी जा ......

भूले भगती भूले शरदा मत्लब के सब करते कर्म

मतलब के है भाई चारे मतलब के सब दीन धर्म

झूठे रिश्ते झूठे नाते कान्हा बड़ा सताते है

सीने पे ये बार न करते पीठ पे छुरी चलाते है

हर तरफ है धोखा ही धोखा

दीप का अब न तोड़ भरोसा अपनी शरण लगा

आ भी जा आ भी जा आ भी जा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।