आई माताजी रा बैलीया रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आई माताजी रा बैलीया रे,

गला में घुंगर बाजे,

अरे गला मे घुंगर बाजे आईजी,

भगतो रा कारज सारे,

बैल मे बिराजे आईजी,

भगतो रा कारज सारे,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे,

अरे आई माताजी रे बैल सवारी,

घणी फुटरी लागे,

आई माताजी रे बैल सवारी,

घणी फुटरी लागे,

सखीया मंगल गावे आईजी,

बैल ने बधावे,

सखीया मंगल गावे आईजी,

बैल ने बधावे,

बैल ने बधावे आईजी,

सखीया गीत सुनावे,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे।।

जिन घर आईजी री बैल आवे,

भूत डाकनीया भागे,

जिन घर आईजी री बैल आवे,

भूत डाकनीया भागे,

बैल मे माँ आई बिराजे,

भगतो ने दर्शन देवे,

बैल मे माँ आई बिराजे,

भगतो ने दर्शन देवे,

भगतो ने दर्शन देवे आईजी,

बेडो पार लगावे,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे।।

अरे आई माताजी रे बैल आगे,

गेर घूमर गाले,

आई माताजी रे बैल आगे,

गेर घूमर गाले,

अरे पग मे घुंगर बाजे गेरीयो रे,

गेर घूमर गाले,

पग मे घुंगर बाजे गेरीयो रे,

गेर घूमर गाले,

अरे आई पंथ री ध्वजा लहरावे,

भक्त जयकारो बोले,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे।।

अरे आई माताजी रे बैल साथे,

बाबा मंडली आवे,

आई माताजी रे बैल साथे,

धर्म गुरूसा आवे,

आई माताजी रे बैल साथे,

धर्म गुरूसा आवे,

अरे धर्म गुरूसा आवे आईजी,

माधव सिंह जी आवे,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे।।

अरे आई पंथ री महिमा ने,

कोई मनीष सीरवी लिखे,

आई पंथ री महिमा ने कोई,

मनीष सीरवी लिखे,

बालोतरा सु गणपत सिंह मैया,

गुण गान थारा गावे,

इन्द्र शर्मा संगीत बजावे,

गुण गान थारा गावे,

आईं माताजी रा बैलीया रे,

गला मे घुंगर बाजे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।