तुमरे बिन हमरा कौन यहां

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॥ पावन पाठ ॥

ओ तारणहारे नाकोड़ावाले,

तुमरे बिन हमरा कौन यहां ।

चरणों में आया, दोषी तल छाया,

तुमरे बिन हमरा कौन यहां ।।

ओ तारणहारे नाकोड़ावाले..

तुम हो तारक, मैं तेरा दीवाना,

तेरा और मेरा नाता पुराना ।

तुम करुणा सागर, मैं प्यासा दरवर,

तुमरे बिन हमरा कौन यहां ।।

मोहमाया ने मुझको हैं घेरा,

विषयो ने लगाया हैं डेरा ।

थोड़ी सी नजर, मुझपे भी तो कर,

तुमरे बिन हमरा कौन यहां ।।

विमल मंडल ये गाये तराना,

तेरे चरणों मे झुकता जमाना ।

मिट जाए हमरे जन्मो के बंधन,

तुमरे बिन हमरा कौन यहां ।।

ओ तारणहारे नाकोड़ावाले..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।