पीपासर रा राज बीरा

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॥ पावन पाठ ॥

पीपासर रा राज बीरा जग में परचा भारी,

भगता रे बेगा आओ म्हारा जम्भेश्वर अवतारी,

जिला जोधपुर गाँव पीपासर आप लियो अवतारी,

माँ हंसा थाने गोद खिलाया पिता लोहट जात पँवारी।

पिपासर रा राज बीरा........

सखियां मंगल गाय गाय ने गढ़ सुदी मंगवाई,

गुडिया रो अभिमान मिटायो पीपासर रे माई,

पिपासर रा राज बीरा.....

सेस के घर आप पधारे घर सेसे की नारी,

जोगी रो थे वेश बणायो लीला जग सू न्यारी।

पिपासर रा राज बीरा.....

विश्नोई थारी करे सेवना इण कलजुग रे माई,

गोरधन थारे धोरे आयो गुरु चरणा में लेई।

पिपासर रा राज बीरा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।