लाखो दानी देखे लेकिन तेरी अलग कहानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लाखो दानी देखे लेकिन तेरी अलग कहानी

भोले दानी बाबा भोले दानी

भोले दानी जय हो भोले दानी

तुमने कोई नहीं की शंका हस्ते रावण को दे डाली लंका,

चुरा ले गया सपने रावण बैठी रही भवानी,

भोले दानी बाबा भोले दानी

भोले दानी जय हो भोले दानी

तेरा पार न कोई पाया तूने अद्भुत रूप बनाया ,

है बुजंग बुशन आभूषण स्वर गंगा महारानी,

भोले दानी बाबा भोले दानी

भोले दानी जय हो भोले दानी

जिनको त्रिभुवन ने ठुकराया उनको तुम ने है अपनाया,

आपा लो हम को भी बे धड़क है लखा अज्ञानी,

भोले दानी बाबा भोले दानी

भोले दानी जय हो भोले दानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।