हो मेरे गुरु जी पालनहार

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॥ पावन पाठ ॥

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

मैं मंगदी रवा दिन रात तू वंडदा रवे हर वार

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

कोई खाली नही जाता है जो दर तेरे ते मंगदा ऐ,

तेरे दर दी बगियाँ दा भी हर इक गुलशन खिल्दा ऐ,

तेरे मंदिर दा परशाद मैं भर भर खावा हाथ

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

सत संग विच तुसी बुला के कर्मा नु तुसी घ्ताउंदे ओ

दुःख रोग दलीदर नु भी तुसी साथो दूर न सोहंदे ओ

शिव शम्भू दा अवतार करे सब दा बेडा पार

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

रोगा नु दूर हटा के साडे मन नु शुद्ध बनाया ऐ,

सबना नु इको समजो साहणु इको पाठ पड़ाया ऐ,

शुकराना करे संसार एहियो रहमत दा दरबार

हो मेरे गुरु जी पालनहार तेरा सजेया रवे दरबार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।