पुरना मैया अपने भगतों की करती भला है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चेत में पुरना के दर जो चला है

पुरना मैया अपने भगतों की करती भला है,

खली लोटा ना हाथ मलाह है

पुरना मैया अपनी भगतो की करती भला है,

तेरे बिन बिनती माँ कौन सुनेगा,

फूल मेरे काँटों को कौन करेगा,

जग से सारे मेरा मन ढोला,

तुही सुनेगी दिल मेरा भोला॥

जग से ना अब कोई शिकवा गिला है,

पुरना मैया..........

मैंने भी माँ जग से है रिश्ते तोड़े,

भर दे तू झोले चाहे खली तू मोड़े,

भगत ये तेरा आज जिद पर आरहा है

छोड़े ना दर तेरे चरणों पड़ा है

तेरी दया से माँ सब कुछ मिला है

पुरना मैया..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।