ये पल बाबा के साथ बताये

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

ये पल बाबा के साथ बताये

ये दिन रात ये बाते,

ये पल बाबा के साथ बताये

कभी बुला ना पाओ गे तुम,

ये दिन रात ये बाते,

ये पल बाबा के साथ बताये

बाबा के प्यार में खो जाओ गे

विचारों में खो जाओ गे,

आना जाना इन विचारों का रोक कभी न पाओ गे,

लेकिन बाबा के प्यार को भी तुम

कभी भुला न पाओगे

ये पल बाबा के साथ बिताए

ये दिन रात ये बाते,

मेरे बाबा है ही ऐसे छोड़ कभी न पाओ गे ,

शिर्डी बुलाया पास बुलाया भूल कभी न पाओगे,

लेकिन बाबा के स्पर्श को भी तुम कभी बुला न पाओगे

ये पल बाबा के साथ बिताए

ये दिन रात ये बाते,

गुरवार को पालकी का निकलना

और द्वारका माई का धुलना

बाबा द्वारा मुझको देखना मन ही मन में कुछ केहना,

मैं तेरे साथ हु बाबा का चेहना

कभी बुला न पाओगे

ये पल बाबा के साथ बिताए

ये दिन रात ये बाते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।