पूरब से चलो पश्चिम से चलो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पूरब से चलो, पश्चिम से चलो॥

उतर से चलो दक्षिन से चलो॥

चलो बोल के जय महा मई,

पूर्णा के दर्श की है तू अई॥

फागुन बीता चेत है आया॥

पूर्णा वाली का ख़त है आया,

माँ ने प्यार से सबको भुलाया साथ सफ़र मे मियाँ का साया,

माँ की रहो में हम माँ की चाहो में हम,

रंग्ये भगती के रंग लेके हाथो मे रंग,

इक इक ने बेत है गाई,

पूर्णा के दर्श...........

भगतों पर रखे माँ अपनी नजरिया,

उची नीची टेडी मेडी डगरिया

पर्वत पे है माँ की नगरिया

भगतों की भारती माँ खाली गगरिया

खिशियो से भरे चाहे धन से भरे दुःख सारे हरे

कहता है दामोदर भाई

पूर्णा के दर्श...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।