शरदा दे नाल भगता बोल जयकारा दाती दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मिल जावेगा तेनु फेर सहारा दाती दा,

शरदा दे नाल भगता बोल जयकारा दाती दा,

कह के जीबा वेख पवित्र दुःख दलीदर होंगे तितर

रेहमत दा जे हो गया इक इशारा दाती दा,

शरदा दे नाल भगता बोल जयकारा दाती दा,

कर दे जो फर्यादा भगता पुरियां हों मुरादा भगता

सब ले खुला रेहन्दा सदा द्वारा दाती दा,

शरदा दे नाल भगता बोल जयकारा दाती दा,

मन विच नाम वसा ले केची

चित चरना विच ला ले केची,

पार होंन लई बन दा नाम किनारा दाती दा,

शरदा दे नाल भगता बोल जयकारा दाती दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।