आंबे मैया दर तेरे आवागे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आंबे मैया दर तेरे आवा गे नच नच भंगडे पावा गे

लावा गे जयकारे तेरे द्वार अमिए

अज सहनु देदे तू दीदार अमिए

कटरे च रेह्न्दी जी सची सरकार जी,

मंग लो मुरादा जाके वारो वार जी

सोने दे मुकट सोने रंगे शेर माँ

सोने दा तू पाया गल हार अमिए

लावा गे जयकारे तेरे द्वार अमिए

अज सहनु देदे तू दीदार अमिए

लगे ने जय कारे नाले ढोल बजदे,

हस्ती दे विच आज सारे नाच दे

रीज साडे दिल दी माँ पूरी करदे

बेह के संगता दे विच पार अमिए

लावा गे जयकारे तेरे द्वार अमिए

अज सहनु देदे तू दीदार अमिए

माहि नु माँ चड़ेया एह गोडे गोडे चा

बॉबी नु मैया चरना दे नाल ला

माही नु माँ चड़ेया एह गोडे गोडे चा

सुमंगल ने देनी एसी भेट माँ सुना

फेर तेनु पेना इथे ओना अमिए

माही नु माँ चड़ेया एह गोडे गोडे चा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।