भाई रे साँचो कहिजे

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॥ पावन पाठ ॥

एह सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,

मुक्ति रो अवसर आवियो,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,

साँचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,

मुक्ति रो अवसर आवियो,

जियो आयो आयो अवसर आज,

मिनख जमारो भल पावियो

कीना कीना प्रहलादे सू कोल,

जीव रे तारण प्रभु आविया,

जियो आया आया पीपासर रे माय,

हंसा माँ गोद ख़िलाविया,

भाई रे जाणो जाणो जाम्भोजी रे धाम

लियो लियो लोहट घर अवतार,

सखियाँ ए मंगल गाविया,

जियो लीनो लीनो लोहट घर अवतार,

सखियाँ ए मंगल गाविया,

जियो जियो गावे गावे हरिजस आज,

अमिय री बरसात पड़े,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम

आया आया समराथल रे माय,

विश्नोई पंथ चलावियो,

गुरुजी दीना दीना,

अमृत पानी पिलावियो,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम

आया आया रोटू नगरी माय,

उमा रे भात भरावियो,

गुरुजी फेरियो फेरियो सिर पर हाथ,

नवरंगी ने चीर ओढावियो,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम

आया आया दूदेजी रे द्वार,

खांडे सू राज दिलावियो,

भाई रे आया आया दुदेजी रे द्वार,

खांडे सू राज दिलावियो,

जियो रे दीनो दीनो मेड़ते रो राज,

गुरुजी रा दर्शन पाविया,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम

गावे गावे जाम्भोजी रा गुणगान,

धिन सुख भजन बणावियो,

भाई रे गावे गावे हरि गुण मंगल आज,

करदो करदो भव सू बेड़ा पार,

विश्नोई कुल में जामो पावियो,

भाई रे साँचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।