अज पाया तू फकीरा घर फेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ देना तेरा दे नि सकदे,

लैके खुशियाँ दा आई तू सवेरा माँ देना तेरा दे नही सकदे

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ

जदो साडी कुटिया च चरण तेरे पाये ने

ऐसी होई रौशनी हनेरे मूक गए ने

तू जो खुशियाँ दा लवा दिता डेरा माँ

देना तेरा दे नही सकदे

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ

चन्दन घुली हवा तू लाइ एसी नाल माँ

जिसने उडाये एथो दुःख जंजाल माँ

होया रोम रोम कर्ज दार तेरा माँ

देना तेरा दे नही सकदे

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ

घडी च मुक्दरा दे ताले गए खुल माँ

कखा दा ही पै गया लखा हूँ मूल माँ

किता मेहला जेहा रेहन बसेरा माँ

देना तेरा दे नही सकदे

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ

एसी निर्दोश मेहर होई हर पासे माँ

मुरजाये मुखा उते खिड गए हासे माँ

दिता रेहमता दा धन तू बथेरा माँ

देना तेरा दे नही सकदे

अज पाया तू फकीरा घर फेरा माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।