काँधे कावड़ ठाली भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

काँधे कावड़ ठाली भोले,

मन मैं धर लिया ध्यान तेरा,

मेरी मंज़िल ने पार लगाईये,

मानूंगा अहसान तेरा,

जय भोले नाथ, जय भोले नाथ....

घणे दिना तै सोचू था मैं हरिद्वार मैं आवण ने,

मन मेरा भी तड़पे था गंगा मैं गोते लावण ने,

भोला भाला जमीदार सू हरयाणे मैं गाम मेरा,

मेरी मंज़िल ने पार लगाईये मानूंगा अहसान तेरा,

जय भोले नाथ, जय भोले नाथ......

माहरे गाम के मन्दिर मैं हो बाबा तने नुहाउंगा,

घिस घिस चंदन भरू कटोरी माथे तिलक लगाऊंगा,

धुप दीप तै करु आरती फेर गाऊ गुणगान तेरा,

मेरी मंज़िल ने पार लगाईये मानूंगा अहसान तेरा,

जय भोले नाथ, जय भोले नाथ........

लाडू पेड़े खावे कौना आक धतूरा ल्याउंगा,

काची काची भांग घोट के भर भर लौटे प्याऊगा,

तुहि मेरा मात पिता है तुहि है भगवान मेरा,

मेरी मंज़िल ने पार लगाईये मानूंगा अहसान तेरा,

जय भोले नाथ, जय भोले नाथ.....

इतनी सूणके टैर जाट की परसन होगे बम भोले,

हरियाणा के खेता मैं फिर बरसे चांदी के गोले,

तेरी जय हो ओघर दानी दिनेश करे गुणगान तेरा,

मेरी मंज़िल ने पार लगाईये मानूंगा अहसान तेरा,

जय भोले नाथ, जय भोले नाथ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।