माँ मुझे सुरों का ज्ञान दो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ मुझे सुरों का ज्ञान दे नित गाऊ तेरी मैं वंदना॥

शारदा सुमन अर्पित करू तेरी करू अराधना॥

विद्या की देवी ज्ञान दे मेरी कल्पना को उड़ान दे,

नई भावना नई चेतना नए ज्ञान का विज्ञानं दे,

पूजा ना जणू तेरी माँ कैसे करू तेरी अर्चना,

माँ मुझे सुरों का.......

चिंतन मण से करू तेरी करू मैं साधना,

माँ मैं कुछ नही तेरे बिना जो रूठी तो लू गा मना,

मेरे कंठ मै आ विराजो माँ मेरे सावरो को सभालना,

माँ मुझे सुरों का.......

हे विधिया ज्ञान पर्धयनी मुझे ज्ञान का वो परकाश दो,

सदगुण माँ वेह्बब शालनी शक्ति और विशवाश दो

घर घर में स्वर सरिता बहे हो जग मे तेरी उपासना

माँ मुझे सुरों का.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।