राम आवे अयोध्या की और

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हाथ लिए धनुष वान

चढ़ चले पुष्पक विवान

संग सिया लखन राम

आवे अयोध्या की और राम आवे अयोध्या की और

धर्म की ध्वजा लिए हनुमान चले साथ में,

विजय निशान राम सेना के हाथ में

सूरज की किरणों में स्वतंत्रता समाई है

बीत गई रात भई भोर

राम आवे अयोध्या की ओर

अंत हुआ बरसों के इन्तजार का

नष्ट हुआ राज घोर अन्धकार का,

दीप जले कोटि कोटि सरयू के किनारे

मच रहा गली गली में शोर

राम आवे अयोध्या की ओर

मिट गया कलंक दुरा चारियो के नाम का

बन रहा विशाल धाम भगतो के राम का

सत्ये की विजय का रच दिया इतहास है

रोक लो बजुयो में जोर

राम आवे अयोध्या की ओर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।