तोरा मन दर्पण कहलाये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तोरा मन दर्पण कहलाये ॥

भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये

तोरा मन दर्पण कहलाये ॥

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय॥

मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय,

इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये,

तोरा मन दर्पण कहलाये॥

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार॥

मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार ,

जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये ,

तोरा मन दर्पण कहलाये॥

तन की दोलत,जल की छाया मन का धन अनमोल॥

तन के कारण मन की धुन को मत मट्टी में रोल,

मन की कदर भूलने वाला हीरा जनम गवाए

तोरा मन दर्पण कहलाये॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।