दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

थारे चरना माहि लाडो को ठिकानों लागे

दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे,

थारे चरना माहि लाडो को ठिकानों लागे

जद जद हिचकी आवन लागे

माहरी आखेया फडकन लागे,

जानो दादी जी ने झुझुनू बुलानो लागे

दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे,

पग पग पर आडा आवो

म्हारे मन की आस पुरावो,

सोचो थाणे माहरो लाड लडानो लागे

दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे,

सुनो सुनो माँ झुंझन वाली सवाती की भी करो रुखाली

थाणे लाडी सर को मान बडानो लागे

दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे,

कदी कदी सुपने में आवो हर्ष माँ सिर पे हाथ फिरावो

माहने दादी थारो प्यार सुहानो लागे

दादी थारो मारो प्रेम पुरानो लागे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।