चल वृन्दावन में प्यारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

धुन- बड़ी देर भई नँदलाला

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

मत पड़ दुनियाँ, के चक्क्र में ll हो जा श्याम सहारे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

जो भी तेरे, मन की बातें, "राधे को बतला देना" l

नहीं जरूरत, शर्माने की, "साफ़ साफ़ बतला देना" ll

राधे बेड़ा, पार करेंगी ll श्याम संग विराजे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

मत पड़ दुनियाँ, के चक्क्र में ll हो जा श्याम सहारे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

बड़ा ही भोला, ठाकुर मेरा, "सब की बिनती सुनता है" l

जैसे चाहो, इन्हे रिझा लो, "ध्यान सभी का रखता है" ll

क्या राजा क्या, रंक सभी को ll भव सागर से तारे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

मत पड़ दुनियाँ, के चक्क्र में ll हो जा श्याम सहारे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

सावन में, दरबार की शोभा, "देख के मन हर्षाता है" l

फूलों के, बंगले में देखो, "सागर भी खो जाता है" ll

डाल डाल और, पात पात भी ll बोले कृष्ण मुरारी रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" l

मत पड़ दुनियाँ, के चक्क्र में ll हो जा श्याम सहारे रे,

"चल वृन्दावन में प्यारे, तेरे कष्ट मिटेंगे सारे" ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।