चर्ण पखारे बिना जाने नहीं दूँगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चर्ण पखारे बिना जाने नहीं दूँगी

विनती करू गी पहिया पडू गी

विरहा की आग में अब न जलुगी

हाथ जोड़ कर बस यही कहुगी

चर्ण पखारे बिना जाने नहीं दूँगी

कितने रूप धरे है तुम ने कन्हाई

किसी अवतार में मेरी सुध न आई

सरयू के नीर नही बन रघुराई

गोदावरी तट पर कुटिया छवाई

इक यमुना ही बस रहे पराई

आये हो अब मोहना जाने ऐसे जाने नही दूंगी

ओ मेरे ठाकुर मैं हु दासी

प्रेम दीवानी दर्श की प्यासी जी भर के अब सेवा करू गी

चरण पखारे बिन जाने न दूंगी

देख दशा भगवान मुस्काये

चरण कमल जल माहि बडाये,

यमुना जी फूली न समाये

धोवत चरण परम सुख पाए,

मन भावन का सपर्श पा चरण कमल सिर धार

शांत हुई घजने लगी यमुना जी की धार

यमुना जी की प्रेम प्रीत का रिनी समय को मान

गोकुल जाते जाते दे रहे अश्वाशन दे रहे भगवान

हे प्राण प्रिया यमुना देते है वचन

बार बार तेरे तट पर आयेगे

मुरली भ्जायेगे गौए चराए गे

प्रेम लीला रास लीला यही पे रचाए गे

देर न करना मैं बात तकूगी

भूल न जाना मैं बात तकूगी

प्रभु तुम्हारे बिना रह न सकू गी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।