मंगसिर नवमी मेलो है भारी

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॥ पावन पाठ ॥

मंगसिर नवमी मेलो है भारी

झुंझुनू जाने की करली है तयारी,

चालो जी बेगा चालो दादी का दर्शन पा लेयो

निकले सवारी भीड़ भारी बैठी सिंगासन मैया हमारी

लागे है सोहनी माँ भोली भाली

झुंझुनू जाने की करली है तयारी,

चालो जी बेगा चालो दादी का दर्शन पा लेयो

ज्योत जगा शा महिमा गा शा

चरना में माँ के शीश युका शा

पल में भरे गी माँ झोली खाली

झुंझुनू जाने की करली है तयारी,

चालो जी बेगा चालो दादी का दर्शन पा लेयो

नोमी को मेलो है अलबेलो

आयो बुलावो है तेरो मेरो

लाडो आयेला देरी क्या की

झुंझुनू जाने की करली है तयारी,

चालो जी बेगा चालो दादी का दर्शन पा लेयो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।