मेरी माँ खोल दे तू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी माँ खोल दे तू,

मेरे भी नसीब को तार दे तू मैया,

इस गरीब को माँ खोल दे तू,

मेरे भी नसीब को...

तेरे दर आके दुख,

दिल के मैं रोता हूँ,

अश्कों से तेरे मैया,

चरणों को धोता हूँ,

तेरे होते दाती क्यों,

दुखियाँ मैं होता हूँ,

चैन से ना जिऊँ मैया,

चैन से ना सोता हूँ,

गले से लगा लो बदनसीब को,

माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को

ज्योत मैं जगाऊँ तेरी सांझ सवेरे,

दूर करो मैया मेरे गम के अंधेरे,

कष्ट निवारो मैया अब तुम मेरे,

आके गिरा हूँ मैया शरण में तेरे,

भूलों ना माँ अपने अजीज को,

माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को...

अपने सलीम को दे दो दिलासा माँ,

ममता से भर दो मैया मेरा भी कासा माँ,

दूर ना जाए मेरे मुखड़े से हासा माँ,

जाए ना दर से तेरा कोमल निरासा माँ,

तोड़ो ना माँ मेरी इस उम्मीद को,

माँ खोल दे तू मेरे भी नसीब को....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।